
ना आने की टोह िमलती है ,
ना जाने की आहट होती है,
कब आते हो, कब जाते हो,
रात भर जागता रहा मै,
बैठा रहा दरवाज़े पर ही,
धूप भी चढ आई है मुन्डेर पर,
कब आते हो, कब जाते हो,
कल से बािरश हो रही है ,
देखता रहता हू रास्ते को ही,
नज़र भी नही आते कदमो के िनशान तक,
कब आते हो, कब जाते हो,
आगन मे धूप पसरी हुई है,
ढुढता रहा, खोजता रहा मै,
नही िमला कोई साया भी मुझको.
कब आते हो, कब जाते हो,
बैठा रहता हू कमरे मै तुम्हारे,
ताकता रहता हू तस्वीर तुम्हारी,
इन िदनो बहुत याद आते हो,
कब आते हो, कब जाते हो............