Sunday, September 18, 2011

यादो को छोड़ कर

 

















सहलाया बहुत हमने ज्हख्मो को उन्हें याद करके , 
सोचते है क्या होगा उन्हें भुला कर, 
कोशिश तो बहुत की हमने , 
लौट जाया करते है वो दस्तक दे कर || 

कब तक सालते रहेंगे हम अपने आप को , 
जो उनसे कुछ कह ना सके ,
वापस नहीं आयेंगे अब , 
वो लम्हे लौट कर || 

पलट के देख लेते है जो कभी तस्वीर उनकी , 
तो सन्नाटे गूंजने लगते है , 
क्या मिला बैचेनी के सिवा , 
यादो का पिटारा खोल कर || 

रिश्ता तोड़ा भी ना जाये ,
रिश्ता बनाया भी ना जाये , 
जाऊ तो जाऊ कहाँ , 
अब मैं इन यादो को छोड़ कर || 




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