Saturday, August 14, 2010

अब तो कोई बात चले



सुने सूखे खतो को अब ,
शब्दों का आधार मिले ,
तोड़ दो इस ख़ामोशी को ,
अब तो कोई बात चले ||

किसी का खोया प्यार बुला लो ,
किसी का बदलता इश्क उठ लो ,
कोई भूली बिसरी दुर्घटना से ,
यादो के फिर फूल खिले |
तोड़ दो इस ख़ामोशी को ,
अब तो कोई बात चले ||

सुख गई है बातो की नदिया ,
एक रसता के आकाल में ,
खोदे हम इसतिहास को अपने ,
शब्दों का नलकूप मिले ,
तोड़ दो इस ख़ामोशी को ,
अब तो कोई बात चले ||

उड़ाले आसमान में गुबारे ,
बाद में चाहे वो खो जाये ,
पहले फैलाये अफवाहों को हम ,
फिर सच्चाई का दौर चले ,
तोड़ दो इस ख़ामोशी को ,
अब तो कोई बात चले ||
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